किलोमीटर के हिसाब से कार मेंटेनेंस शेड्यूल
1 अक्टूबर 2026 को अपडेट किया गया
अपनी ओडोमीटर रीडिंग डालें और एक चेकलिस्ट पाएं: आपके किलोमीटर के आसपास अभी क्या देय है, और आगे क्या आ रहा है। यह आम 30,000/60,000/90,000 किमी सर्विस पैटर्न पर आधारित है। अपनी ठीक गाड़ी के लिए आख़िरी फ़ैसला आपकी ओनर्स मैनुअल का है। यह आपके ब्राउज़र में ही चलता है; कुछ भी सेव या भेजा नहीं जाता।
SteerLog इस चेकलिस्ट को आपकी लॉक स्क्रीन पर रिमाइंडर में बदल देता है — हर कार के लिए, तारीख़ और किलोमीटर दोनों से।
SteerLog पाएँ30,000 / 60,000 / 90,000 किमी मेंटेनेंस शेड्यूल
ज़्यादातर कार कंपनियों का शेड्यूल हर 30,000 किमी पर दोहराता है, बीच में छोटी सर्विस के साथ। एक सामान्य पेट्रोल/डीज़ल कार के लिए यही आम पैटर्न है:
| हर | सर्विस |
|---|---|
| 10,000 किमी | इंजन ऑयल और फ़िल्टर · टायर रोटेशन |
| 15,000 किमी | ब्रेक जाँच · वाइपर और बैटरी जाँच |
| 30,000 किमी | इंजन एयर फ़िल्टर · केबिन एयर फ़िल्टर · कूलेंट और ट्रांसमिशन फ्लुइड जाँच |
| 60,000 किमी | ब्रेक फ्लुइड फ्लश · ट्रांसमिशन फ्लुइड सर्विस · बेल्ट और होज़ जाँच |
| 90,000 किमी | स्पार्क प्लग · टाइमिंग बेल्ट (अगर है) |
सीवियर सर्विस (छोटे सफ़र, टोइंग, धूल, तेज़ गर्मी) ज़्यादातर इनको जल्दी ला देती है। इलेक्ट्रिक कारें इंजन वाले काम छोड़ देती हैं। उन्हें भी अपने शेड्यूल पर टायर, ब्रेक, केबिन फ़िल्टर और कूलेंट चाहिए।
एक उदाहरण के साथ समझें
ओडोमीटर 28,900 किमी पर है:
- अभी देय: आप 30,000 किमी वाली विंडो के अंदर हैं। यानी इंजन ऑयल और फ़िल्टर, टायर रोटेशन, ब्रेक जाँच, वाइपर और बैटरी जाँच, इंजन एयर फ़िल्टर, केबिन एयर फ़िल्टर, और कूलेंट व ट्रांसमिशन फ्लुइड जाँच — ये सातों एक साथ इसी विंडो में आ जाते हैं।
- अगला माइलस्टोन: 60,000 किमी की सर्विस (ब्रेक फ्लुइड, ट्रांसमिशन फ्लुइड, बेल्ट व होज़ जाँच) अभी 31,100 किमी दूर है, और स्पार्क प्लग 90,000 किमी पर — यानी 61,100 किमी दूर।
- सबसे नज़दीकी बड़ा माइलस्टोन: 30,000 किमी — सिर्फ़ 1,100 किमी दूर।
वाजिब सवाल
कारों के लिए 30-60-90 का नियम क्या है?
यह छोटा तरीक़ा है यह कहने का कि कार कंपनियाँ बड़ी सर्विस 30,000, 60,000 और 90,000 किमी पर रखती हैं। 30k सर्विस ज़्यादातर फ़िल्टर और जाँच होती है। 60k में फ्लुइड जुड़ते हैं — ब्रेक, ट्रांसमिशन और कूलेंट। 90k पर स्पार्क प्लग और टाइमिंग से जुड़े पुर्ज़े आते हैं। ऑयल चेंज जैसे छोटे काम बीच में दोहराते रहते हैं।
30,000 किमी पर क्या मेंटेनेंस होता है?
आम तौर पर 30,000 किमी की सर्विस में इंजन एयर फ़िल्टर, केबिन एयर फ़िल्टर, और कूलेंट व ट्रांसमिशन फ्लुइड की जाँच होती है। इसके ऊपर सामान्य ऑयल चेंज, टायर रोटेशन और ब्रेक जाँच तो होते ही हैं। तीनों बड़ी सर्विस में यह अक्सर सबसे सस्ती होती है।
60,000 किमी पर क्या मेंटेनेंस होनी चाहिए?
60,000 किमी पर ज़्यादातर शेड्यूल में ब्रेक फ्लुइड फ्लश आता है। कई गाड़ियों में ट्रांसमिशन फ्लुइड भी बदलता है, कुछ में कूलेंट, और बेल्ट व होज़ की जाँच होती है। सामान्य ऑयल, रोटेशन और फ़िल्टर तो चलते ही रहते हैं। टायर और बैटरी भी अक्सर इसी के आसपास ख़त्म होने लगते हैं — यही वजह है कि 60k सर्विस महँगी लगती है।
1,00,000 किमी पर क्या बदलवाना चाहिए?
90,000–1,00,000 किमी के आसपास स्पार्क प्लग बदलें। लंबी उम्र वाले इरिडियम सेट लगभग इतने के लिए ही रेट किए जाते हैं। जिन इंजन में टाइमिंग बेल्ट है, वहाँ उसे भी बदलें — यह ज़रूरी काम है, क्योंकि टूटी बेल्ट इंजन बिगाड़ सकती है। साथ में कूलेंट होज़ और सस्पेंशन, स्ट्रट व इंजन माउंट की अच्छी तरह जाँच करें।
टायर कितनी बार रोटेट करने चाहिए?
ज़्यादातर गाड़ियों में हर 10,000 किमी पर। यह ऑयल चेंज जैसा ही इंटरवल है, इसलिए दोनों एक साथ करवाना आसान आदत बन जाती है। रोटेशन से आगे-पीछे के टायरों की घिसावट बराबर होती है, जिससे चारों टायर साथ-साथ चलते हैं। इसे छोड़ने पर एक सेट हज़ारों किलोमीटर जल्दी ख़त्म हो सकता है।
34,000 किमी पर यह सब याद रहेगा?
किसी को याद नहीं रहता। लॉग रखने का यही मतलब है। SteerLog हर कार की सर्विस हिस्ट्री रखता है और तारीख़ व किलोमीटर दोनों से याद दिलाता है। इसके मेंटेनेंस प्रीसेट यह पूरी चेकलिस्ट हर कार के लिए पहले से लोड कर देते हैं। न अकाउंट, न साइन-अप, और यह रिकॉर्ड 15 साल बाद भी आपका ही रहेगा। देखें SteerLog कैसे काम करता है।